कि कोई दीवाना कहता है ,
......................................... वाह -२ वाह -२ .... अरे दाद देनी है खाज नही देनी है ,
......................................... सुनियेगा.....मस्ती के साथ सुनियेगा ,
......................................... इसका वोल्लुम बढ़ा दो भाई मेरा कम है ,
कि कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ,
......................................... नोजवान दोस्त मेरा साथ दें, वाह -२
......................................... मैं समझ गया कि तुम हो ,
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ,
मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है ,
........................................ वाह -२ क्या बात है वाह -२ ,
मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है ,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
......................................... अब दिल धडके तो उसे तालियों मैं बदलना ,
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है,
ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है ,
........................................... वाह -२ वाह -२
ये तेरा दिल
............................................ ये इस बार के सेमेस्टर मैं आने वाली है , :)
कि मोहब्बत एक एहसासों कि पावन सी कहानी है ,
............................................ वाह....बहुत अच्छे वाह -२ तुम यहां थे, :)
............................................ मैं तो तुम्हें आगरे मैं ढूंढ रहा था ,
कि मोहब्बत एक एहसासों कि पावन सी कहानी है ,
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है ,
यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों मैं आँसू हैं ,
................................ ये पंक्ति सुनना और आप तक पहुँच जाए तो सूचित करना ,
यहां सब लोग कहते हैं मेरी आंखों मैं आँसू हैं ,
जो तू समझे तो मोती हैं जो ना समझे तो पानी है ,
............................... बहुत खूब वाह -२ -२ -२ क्या बात है वाह -२-२-२ बहुत खूब
जो तू समझे तो मोती हैं
.......................................... और एक बात और ध्यान से सुनना आप उस दौर मैं हैं जब आप विशिष्ठ हैं जीवन को इस तरह जीना कि कोई मिले कभी तो ख़ुद से नज़र मिला सको , ग़ालिब ने कहा है ये ग़ालिब का शहर है दिल्ली , किसी से मिलने पर शेर सुनना बड़े शायर का
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे ,
मत पूछ कि क्या हाल है
............................................. मैं आर इ सी मैं पढता था मगर एक सेमेस्टर छोड़ कर भाग आया और यहां पढ़ा रहा हूँ क्योंकि मुझे लगा इट्स बेटर टू बी ए गुड पोएट देन ए बैड इंजिनियर. अब तो मैं अपना ही भविष्य बिगाड़ रहा हूँ तब तो मैं देश का बिगाड़ रहा होता .
पंक्ति पढता हूँ
ग़ालिब ने कहा
मत पूछ कि क्या हाल है मेरा तेरे पीछे ,
तू देख कि क्या रंग है मेरा तेरे आगे ,
............................................ क्या बात है
अब पंक्तियाँ सुनना
कि समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नही सकता ,
............................................ लड़कों कि ख़ास दाद चाहिए मुझे इस पर
समंदर पीर का अंदर है लेकिन रो नही सकता ,
ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नही सकता ,
........................................... क्या बात है वाह -२ वाह -२
ये आँसू प्यार का मोती है इसको खो नही सकता ,
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले ,
.................................. और जो खुद्दार लोग हैं उनकी तालियाँ लहरती हुई दिखाई दें
मेरी चाहत को अपना तू बना लेना मगर सुन ले ,
जो मेरा हो नही पाया वो तेरा हो नही सकता ,
................................... वाह -२ वाह -२ बहुत खूब
जो मेरा हो नही पाया
और एक मुक्तुक और सुनिये इसके बाद मैं कविता पढता हूँ ,
..................... प्रेम मैं जैसा गजेंदर सोलंकी ने बताया भारत एक बड़ा हिपोक्रेट देश है
....................................प्रेम हिन्दुस्तान मैं एक ऐसा विषय है जिसमें केवल थेओरी कि क्लास चलती हैं :)
मैं आपको चार पंक्तियाँ पढाता हूँ सुनियेगा चार पंक्तियाँ और ये बिल्कुल मस्ती कि पंक्तियाँ हैं बरसों प्रेम लिखने के बाद यदि आप यदि प्रेम करें तो क्या दिक्कत आती हैं देश मैं सुनिएगा ..
कि भ्रमर कोई कुमुदिनी पर
....................................... मस्ती के साथ सुनना और मैं जो सुनाना चाह रहा हूँ वहीं पहुचियें वरना स्लिप हो सकती है बात
भ्रमर कोई कुमुदिनी पर मचल बैठा तो हंगामा ,
हमारे दिल मैं कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा ,
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
................................ वाह -२ और प्रोफेसर्स कि भी दाद चाहता हूँ इन बच्चों के साथ
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का ,
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा ,
मैं किस्से को हकीकत मैं बदल बैठा तो हंगामा
.............................................. वाह -२ बहुत खूब
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है ,
मगर धरती की बैचेनी को बस बादल समझता है
Wednesday, December 5, 2007
कोई दीवाना कहता है....
Posted by
Luckky
at
12:14 AM
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