प्यार तो कर लेते हम ज़रूरी था दोस्त का मिलना ,
वो दिखे तो हमें लगा की आ गई दोस्ती ,
हुस्न की पहली नज़र दिल को लगी .... पर बचना ,
क्यूंकि प्यार चेहरे से नहीं ,दिल से होता है .... जैसे दोस्ती .
हुस्न की दौलत को हम नहीं देते अहमियत ,
पर खुदा ने उन्हें मल्लिका-ऐ-हुस्न से नवाजा है ,
कल तक हम दिल देखते थे आज चेहरा उनका है ज़रूरत,
पर कल चली जायेगी वो अगर हाल-ऐ-दिल सुनाया न गया.
दिल तो आया था उसपर पर प्यार का यकीं नहीं था ,
बात कर कर के जाना की उसमे दिल भी है दिमाग भी ,
और बचपना भी कूट कूट के भरा है अभी तक जैसे की भगवान की चाह ,
पर मिल न सकेगी वो इतनी आसानी से जो भगवान् की है अजीज़ भी ,
कल जिन्दगी में शायद वो न रहेगी ,
और अपंग वो (जिन्दगी) चल भी नही पाएगी ,
कुछ कमी जिन्दगी भर के लिए रहेगी ,
और जिन्दगी से रहेगा मलाल की मिलाया क्यों ... जब था ही नहीं साथ कभी !!
Wednesday, November 14, 2007
प्यार तो कर लेते ...
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