तुम्हारा न होना....
इस तरह गुज़रा है मेरे भीतर
जैसे धागा गुज़रता है सूई से
मैं जो भी करता हूँ अब...
उसमें दिखता है वो धागा
तुम्हारी याद के रंग का...
इस तरह गुज़रा है मेरे भीतर
जैसे धागा गुज़रता है सूई से
मैं जो भी करता हूँ अब...
उसमें दिखता है वो धागा
तुम्हारी याद के रंग का...
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